शिशिर ऋतु


जब उत्तरी गोलार्ध का अक्षीय झुकाव होता है तो शिशिर प्रारम्भ होता है और यह झुकाव सौर मंडल में सूर्य की पृथ्वी से नजदीकी के अनुसार होता है जो हर वर्ष 21/22 दिसम्बर को होता है, शिशिर ऋतु के बारे में महा कवि कालिदास ने ऋतुराज शब्द लिखा है वैसे सामान्यतः ऋतुराज वसंत को कहा जाता है। 

प्ररूढ़शाल्यंशुचयैरमनोहरं कंचितस्थितकौंचनिनादराजितं

प्रकामकामं प्रमादजनप्रियं वरोरूकालं शिशिरहरयं शृणु । 


आईये एक रचना मेरी लिखी हुई पढिये। साहित्य का आनंद उसकी शब्द क्षमता में ही है कोई कहे कि क्लिष्ट शब्द नहीं लिखे जाने चाहिए तो यह अज्ञानता है। बिना आवश्यक साहित्यिक शब्द के काव्य बिल्कुल श्रृंगार रहित नारी की तरह लगता है।


आज से शिशिर ऋतु का शुभागमन है:

शिशिर के स्वागत में यह रचना, प्रेरणा ऋतु संहार से!!!


अनध्याय  निःशब्द मार्ग  तुषार  वेग  वायु  कम्पित है

प्रतीक्षा  तितिक्षा  द्युति अभिक्षा निरीक्षा उर स्पंदित है

पल्लव-पात-रत   विभीषिका आशान्वितपात हरित है 

दृश्य प्रमोद शाख  पोषित पुष्प   नीहार आच्छादित है।


दूरस्थ  आर्क   हुआ   मध्यम  कम्पन  छाया तिमिर में

आरुषी की मिहिका जटिल कर रही है मार्ग शिशिर में

तुषारित पवन झोंको से  विचलित निबद्ध है शिविर में

बाल वृद्ध  छोड़  सब  कार्य  ढूंढ रहे  आतप मिहिर में।


शिशिर  ऋतु राज, चंचल द्योतिस रश्मियाँ चहुँ ओर हैं

धवल-धवल दिगंत शिथिल तरु शाख तुषारित भोर है

तुषारापात  अद्भुत प्रात विभंजन, पात निपात सकल

नूतन पल्लव चाह लिए तरु ज्यूँ तरुणी हो रही विकल।


====सुरेश चौधरी

अनध्याय: चुपचाप-साइलेंट /तितिक्षा: धैर्य/ निरीक्षा: निरीक्षण/ आर्क: सूर्य का/ आरुषि: सूर्य की पहली किरण/ मिहिका: ओस, मिस्ट,/ द्युतिस: चमक लिए /विभंजन: तोड़ना फ्रैक्चर।

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