हाकिम के मुॅंह पर सच कहना सबके बस की बात नहीं।

बेपर्दा हर झूठ को करना सबके बस की बात नहीं।।


एक अटल ही हुआ है जग में जिसपर कोई दाग नहीं,

राजनीति में बचके रहना सबके बस की बात नहीं।


हृदय में लेकर प्रेम समर्पण छल प्रपंच को त्याग सभी,

दुश्मन से भी हॅंसकर मिलना सबके बस की बात नहीं।


धन दौलत सारी खुशियाॅं भी सबकुछ देश के नाम करी,

न्यौछावर ये जीवन करना सबके बस की बात नहीं।


उच्च शिखर ये मान-प्रतिष्ठा का पाया अपने बल पे,

काॅंटों के रस्ते पे चलना सबके बस की बात नहीं।


जान रहा हूॅं पीठ में ख़ंजर किस किसने घोंपा है विजय,

गद्दारों के बीच में रहना सबके बस की बात नहीं।

                  विजय तिवारी, अहमदाबाद

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