एक आगंतुक
दरवाजे से
झांक रहा है अंदर
जो एक साल तक
रहने वाला है
उसका घर
ओ जाने वाले साल
जब तू दुनिया में आया
हमने कुछ खोया
और बहुत कुछ पाया
उन बीते हुये पलों को
कोई भुला न पाया
अब तू जाने वाला है
अलविदा, अलविदा
अलविदा, अलविदा।
शाम की लालिमा भी
अब जा रही है
ढल रहा है सूरज
रात आ रही है
नभ तारों की माला
पिरोने को है
दिन थक गया
अब सोने को है
फिर एक नई सुबह
होने को है
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा।
एक मुसाफिर जा रहा
छोड़कर यह जहां
गलतियां कुछ हुईं
कुछ यहाँ, कुछ वहां
छोड़कर कुछ खुशी
कुछ गम के निशां
कह रहा है सबसे
"अब हो रहा हूँ जुदा
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा।"
एक दीप जलकर
अब बुझ रहा है
दूसरा भी अब
जलने को है
एक फूल खिलकर
अब मुरझा रहा है
दूसरा भी अब
खिलने को है
तुमने जाते-जाते
बहुत कुछ दिया
शुक्रिया, शुक्रिया,
शुक्रिया, शुक्रिया
अब जाने का भी
समय आ गया
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा।
एक साल जा रहा
दूसरा आ रहा
पर न कोई शिकायत
न कोई गिला
कुछ हँसी तो
कुछ आँसू मिले
पर साथ तुम्हारा
बराबर मिला
यूँ ही जीवन का
क्रम सदा है चला
काफिले यूं ही
चलते रहे
लोग मिलते और
बिछड़ते रहे
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा।
पल-पल हर दिन
गुजरता रहा
तुम बने मीत
साथ जब तक रहा
तुम हम पर फिदा
हम तुम पर फिदा
अब यादों में ही
तुम रहोगे सदा
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा।
जीवन में अजनबी
बहुत ही मिले
न साथ किसी का
सदा को मिला
मिलने जुलने का
चलता रहा सिलसिला
साथ छूटा किसी का
तो कोई और मिला
आते-जाते वह भी
गले लग गया
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा।
एक आगंतुक
दरवाजे से
झांक रहा है अंदर
जो एक साल तक
रहने वाला है
उसका घर
ओ जाने वाले साल
जब तू दुनिया में आया
हमने कुछ खोया
और बहुत कुछ पाया
उन बीते हुये पलों को
कोई भुला न पाया
अब तू जाने वाला है
अलविदा, अलविदा,
अलविदा, अलविदा ।
-शन्नो अग्रवाल
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