मांँ यह शब्द नहीं है ,
यह तो मेरी दुनिया है ।
जब मांँ कहती हूँ,
मिश्री सी कानों में घुलती
एक सुंदर सा अहसास
मन में छा जाता उल्लास ।
मांँ ममता की मूर्ति
करूणा की छाया
माँ में ही तो सारा
संसार समाया ।
माँ ही तो हर पल
ध्यान हमारा रखती ।
दिन हो चाहे रात ,
वो कभी नहीं थकती ।
जब शादी के बाद
मैं आ गयी ससुराल ।
एक माँ ही तो थी ,
जिसकी याद बहुत आई ।
अब भी जबकि मैं भी
एक माँ हूँ ।
करती हूँ माँ को फोन ,
पूछती हूँ हर पर्व पर
कैसे करनी है पूजा ।
वही बताती हैं हर छोटी
बड़ी बातें ,
जब बच्चे थे छोटे और मैं
जब जाती थी
माँ के पास
माँ ही तो मेरे बच्चों का
रखती थी ऐसे ध्यान ।
जैसे फिर से मेरा बचपन
उनकी गोद में लौट आया ।
जब मालिश कर बच्चों को
नहलाकर काजल माँ थीं
लगातीं
साथ ही नजर का टीका
जरूर ही लगातीं ।
माँ ही तो हर पल
चिन्ता जतातीं
आज भी जब मेरे बच्चे
बड़े हो चुके हैं ।
अपने पैरों पर
खड़े हो चुके हैं ।
मेरी ही तरह उनको
भी है रहता ।
हर शनिवार को उनके
आने का इंतजार ।
फोन करके हैं पूछतीं
बच्चों के आने का समय ,
फिर आ जाती हैं कुछ देर
के लिए मेरी माँ ।
कभी - कभी यूँ ही
फोन हैं कर लेती
कभी फोन कर याद
दिला देती हैं पर्व और
व्रत की
क्योंकि मांँ जानती हैं कि
कहीं मैं भूल ना जाऊँ ।
कभी - कभी जाड़े में
मांँ का फोन सिर्फ
यह बताने के लिए है आता
कि धूप निकल आई ।
माँ को चिन्ता रहती है कि कहीं
मैं नीचे घर में ही रह जाऊँ,
इसलिए बताती हैं कि
धूप निकल आई ।
मुझे अच्छी तरह याद है ,
जब मैं महीनों बिस्तर पर पड़ी थी,
घर वाले तो साथ थे ही
माँ भी दिन रात जागीं थीं।
अब मेरी माँ बुजुर्ग हो चुकी हैं,
उम्र के उस मोड़ पर खड़ी हैं ।
जब भूल जाती हैं कुछ बातें ,
अब तो त्यौहार भी भूल जाती हैं ।
फोन करके वही बात बताती हैं,
जो शायद दो बार बता चुकी होती हैं और
हम बहनें सुन लेते हैं उनकी बातों को
इस प्रकार जैसे पहली बार सुन रहे हों
कभी नहीं टोकते कि माँ तुम यह सब कह चुकी हो ।
हाँ अब माँ कुछ बदल सी गयी हैं,
अब कुछ -कुछ बच्ची सी बन गयी हैं ।
हार्ट का हो चुका हैं दो बार ऑपरेशन
अब उनका है करवाना आँख का ऑपरेशन ,
वैसे हैं बहुत ही बहादुर ,बहुत कष्ट भी हैं झेले ,
लेकिन अब कुछ - कुछ डरतीं हैं ।
चाहे उम्र कुछ भी हो लेकिन वो
एक माँ हैं,
आज भी ले आतीं हैं खाने की कोई
चीज ,थोड़ी सी बचाकर
मेरे लिए, हमारे लिए ।
रहतीं हैं तैयार सदा परेशानी में
साथ निभाने को
वो मांँ हैं ।
हे ईश्वर आप कृपा करना
माँ को मेरे पास ही रखना
क्योंकि मांँ तो मांँ हैं ।
पूनम दीक्षित
रामपुर ,उत्तर प्रदेश
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