उजाले काम आते हैं

 तमाशे ज़िन्दगी में... इस तरह के आम आते हैं, 

जहाँ अपने मुकर जाएँ, वहाँ बे-नाम आते हैं।


वो आए थे मसीहा बन, मगर निकले नकाबपोश, 

हमें लूटने को अपनों के ही... पैगाम आते हैं।


भले हैं वो अदू (दुश्मन), जो सामने से वार करते हैं, 

हमें डसने को अक्सर... दोस्त के अंदाज़ आते हैं।


बयां करने से अब तो... ज़ब्त की भी शर्म आती है,

 कि दंश अपनों ने ही दिए... जो हरदम याद आते हैं।


 भरोसा छोड़ ऐ 'दिल', अब हकीकत को गले लगा,

 कि अक्सर भीड़ में 'गैरों' की ही... अपने मिल जाते हैं।


अंधेरों ने सिखाया है... हकीकत को गले लगाना,

 जलेगी खुद 'शिखा' तब ही... उजाले काम आते हैं।

                      शिखा रस्तोगी-थाईलैंड

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