पहला अक्षर साल का, लिखता मैं श्री राम
रघुनंदन ही साधते, मेरे बिगड़े काम
मेघ श्याम आनन द्युतित, कान्तिमयी वामांग
आर्ति निवारक राम प्रभु,करूँ तुम्हे साष्टांग
आईये नव वर्ष का शुभारंभ हम परम दयालु प्रभु श्री राम की रूप आराधना से करें , कितना प्यारा अलौकिक रूप है
अधर बिम्ब फल दृग जलज, मधुर मधुर मुस्कान
सजे कोदंड वाम कर, राघव कृपानिधान
नवीन नील नीरद शुभकांति, कुञ्चित कच कपोल सोहे
कुंतल कुंडल भाल तिलक सज, कटितट पीताम्बर मोहे
रत्न जड़ित किरीट मौली धर, कोटि रवि तेज सम राजे
भ्रू रूचिर रक्तोपल लोचन, सुंदर नासिका विराजे
बिम्बफल सदृश अधर मनोहर, रदन वज्र मधुर मुस्कान
कामारि आशुतोष हृदय के, मानस मराल कृपानिधान
हृदय शोभित श्री वत्सल चिन्ह, भुज केयूर हीरक धन
कटि करधनी मधुर स्वर रसाल, अजान बाहु सत्य वचन
वामांग सिय हेम सिंहासन , तमाल वृक्ष वल्लरी सम
भुजदंड कोदंड वाम बाहु, दक्षिण पाणि बाण एकम
हैं युगल पद पद्म पद्मालय, पापहरण अखण्ड स्वामी
'इंदु' इंदु मुख सरोरुह नयन, सुखकारी अन्तर्यामी
सुरेश चौधरी ‘इंदु’
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