आओ कुछ फरियाद करें
ऊपरवाले को याद करें
अविश्वास ओर तनाव के इस दौर मे प्रेम की दो बात करें
आओ कुछ फरियाद करें
बड़ी ही संगदिल ये दुनिया है रिश्तों का अकाल है
तंगदिल जीवन के आगे इन्सान बेहाल है
क्या याद करे क्या हिसाब करें
आओ कुछ फरियाद करें
प्यार मोहब्बत केवल किताबी एक ज्ञान रह गया है
किस्से कहानियों तक सीमित एक मनोरंजन विज्ञान रह गया है
आओ इस विज्ञान की कब्र-ए-रात करें
आओ कुछ फरियाद करें
नफरत के बाज़ार मे प्रेम कहाँ से लाऊं
मार काट के इस दौर मे फूलों का गुलदस्ता कैसे सजाऊं
क्या पाया क्या खोया कैसे उसे बताऊं
झूठे ईमान ओर मतलबपरस्ती के आगे समय भी अब है बिकाऊ
आ गया वो दौर अपने अपनो से ही हिसाब करें
आओ कुछ फरियाद करें
ज़िन्दगी के दर्द को बेपनाह याद करें
बड़ी ही हसरतों से सफर शुरु हुआ था
भरोसे ओर प्यार का एक सपना ही खुद मे संजोया था
गैरियत का ऐसा सैलाब आया सपने सब हवा हो गये
हम रोते रहे खुद से खुदा से ही जुदा हो गये
आओ फिर रिश्ते मे एक वफादात करें
आओ कुछ फरियाद करें
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र
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